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जनवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रोचक कहानी-संग्रह

नदी में हाथी की लाश बही जा रही थी। एक कौए ने लाश देखी, तो प्रसन्न हो उठा, तुरंत उस पर आ बैठा। यथेष्ट मांस खाया। नदी का जल पिया। उस लाश पर इधर-उधर फुदकते हुए कौए ने परम तृप्ति की डकार ली। वह सोचने लगा, 'अहा! यह तो अत्यंत सुंदर यान है, यहां भोजन और जल की भी कमी नहीं। फिर इसे छोड़कर अन्यत्र क्यों भटकता फिरूं।' कौआ नदी के साथ बहने वाली उस लाश के ऊपर कई दिनों तक रमता रहा। भूख लगने पर वह लाश को नोचकर खा लेता, प्यास लगने पर नदी का पानी पी लेता। अगाध जलराशि, उसका तेज प्रवाह, किनारे पर दूर-दूर तक फैले प्रकृति के मनोहरी दृश्य, इन्हें देख-देखकर वह विभोर होता रहा। नदी एक दिन आखिर महासागर में मिली। वह मुदित थी कि उसे अपना गंतव्य प्राप्त हुआ। सागर से मिलना ही उसका चरम लक्ष्य था, किंतु उस दिन लक्ष्यहीन कौए की तो बड़ी दुर्गति हो गई। चार दिन की मौज-मस्ती ने उसे ऐसी जगह ला पटका था, जहां उसके लिए न भोजन था, न पेयजल और न ही कोई आश्रय। सब ओर सीमाहीन अनंत खारी जल-राशि तरंगायित हो रही थी। कौआ थका-हारा और भूखा-प्यासा कुछ दिन तक तो चारों दिशाओं में पंख फटकारता रहा, अपनी छिछली और टेढ़ी-मेढ़ी उड़...

पूर्णिमा को करे ये उपाय

सभी को नमस्कार ।।आज पूर्णिमा है आज का परिणाम बहुत ही फलदाई है आप पूर्णिमा के दिन अपने घर में परिवार में सुख शांति हेतु कुछ छोटी-छोटी उपाय अवश्य करें जिससे आपके घरों में खुशहाली बना रहे हैं घरों में परिवार में खुशहाली बना रहे आज पूर्णिमा के दिन सबसे प्रथम पड़ता है प्रातः काल उठकर के सूर्योदय से पहले अवश्य उठे उठने के बाद स्नान के समय जल में थोड़ी हल्दी अवश्य से मिलाएं नहाने के बाद श्री  सूर्य भगवान को हो सके तो जल में लाल रोड़ी लाल फूल अक्षत हल्की सी हल्दी डालकर जल दे श्री विष्णु भगवान को याद करते करते हुए कम से कम ओम नारायणाय नमः का जाप कम से कम 11 बार हो सके तो 1008 1008 बार अवश्य करें घर में महिलाएं आज पोछा लगाने समय काली मिर्च पाउडर एवं नमक अवश्य डालें एवं आज कांच के बर्तन में भर कर शौचालय में रखें घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बना हुआ है तो ठीक है नहीं तो हल्दी से मुख्य दरवाजे पर स्वास्तिक  बनाएं शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे पर लेफ्ट एंड राइट का दीपक जलाएं श्री तुलसी जी के पास एक दीपक जलाएं एवं शमी का पौधा तो वहां वहां भी एक तिल का तेल से दीपक कैसे जलाएं तिल का तेल ना ह...

पाप पुण्य

अधर्म करने वालों को लगता है कि पूजा पाठ, नाम जप, दान पुण्य करेगे तो पाप कट जाएगा ! ऐसे लोगों को यह बात स्पष्ट रूपसे ध्यान रखनी चाहिए कि अच्छे बुरे कर्म का फल अवश्य मिलता है!"अवश्यमेवभोक्तव्यं" धनवान व्यक्ति अपंग हो सकता है. पुण्य के कारण धन प्राप्त हुआ किन्तु पाप के कारण उसे अपंगता प्राप्त हुई. अतः प्रत्येक कर्म का फल भोगना ही पडता है! कर्म फल का सिद्धान्त जानते हुए और ईश्वर की सत्ता को मानते हुए जान बूझ कर पाप करता है उसे ईश्वरीय विधान अनुसार एक नास्तिक से अधिक कडा दंड दिया जाता है ! अतः पाप करने से पहल उसके फल के बारे में एक बार विचार अवश्य करें! 🕉☘💦

तुलसीदास और बाबर

सच ये है कि कई लोग तुलसीदास जी की सभी रचनाओं से अनभिज्ञ है और अज्ञानतावश ऐसी बातें करते हैं l वस्तुतः  रामचरित मानस के अलावा तुलसीदास जी ने कई अन्य ग्रंथो की भी रचना की है . तुलसीदास जी *(1) मन्त्र उपनिषद ब्राह्मनहुँ बहु पुरान इतिहास ।* *जवन जराये रोष भरि करि तुलसी परिहास ॥* श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि क्रोध से ओतप्रोत यवनों ने बहुत सारे मन्त्र (संहिता), उपनिषद, ब्राह्मणग्रन्थों (जो वेद के अंग होते हैं) तथा पुराण और इतिहास सम्बन्धी ग्रन्थों का उपहास करते हुये उन्हें जला दिया । *(2) सिखा सूत्र से हीन करि बल ते हिन्दू लोग ।* *भमरि भगाये देश ते तुलसी कठिन कुजोग ॥* श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि ताकत से हिंदुओं की शिखा (चोटी) और यग्योपवीत से रहित करके उनको गृहविहीन कर अपने पैतृक देश से भगा दिया । *(3) बाबर बर्बर आइके कर लीन्हे करवाल ।* *हने पचारि पचारि  जन तुलसी काल कराल ॥* श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि हाँथ में तलवार लिये हुये बर्बर बाबर आया और लोगों को ललकार ललकार कर हत्या की । यह समय अत्यन्त भीषण था । *(4) सम्बत सर वसु बान नभ ग्रीष्म ऋतु अनुमानि ।* *तुलसी अवधहि...

महिमा प्रयागराज

प्रथमं तीर्थराजं तु प्रयागाख्यं सुविश्रुतम् । कामिकं सर्वतीर्थानां धर्मकामार्थमोक्षदम् ।।            तीर्थराज प्रयाग का नाम स्मरण करने से ही मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।वह पूर्ण निष्पाप होकर मोक्षपद का अधिकारी बन जाता है।इनके दर्शन ; नाम-संकीर्तन अथवा यहाँ की मिट्टी का स्पर्श करने से ही मनुष्य पाप-मुक्त हो जाता है।यहाँ पाँच कुण्ड हैं।इन्हीं कुण्डों के बीच मे गंगा जी प्रवाहित हो रही हैं।इसलिए प्रयाग मे प्रवेश करते ही मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।गंगा तो वैसे ही पतित पावनी हैं।इनका नाम स्मरण करने से ही मनुष्य पाप मुक्त हो जाता है।यदि कोई प्रयाग आकर गंगा का दर्शन ; स्नान और जलपान कर ले तो वह यावज्जीवन मंगलमय स्थिति मे रहता है।उसकी सात पीढ़ियाँ तर जाती हैं।जो व्यक्ति पूर्ण संयम नियम के साथ संगम मे स्नान करता है ; वह पापमुक्त होकर समस्त मनोरथों को प्राप्त कर लेता है।

प्रभू महिमा

एक दिन महादेव श्रीराम से मिलने अयोध्या आए. श्रीसीताराम जी बहुत खुश हुए. सीताजी स्वयं भोजन बनाने के लिए रसोई में चली गई. शिवजी ने पूछा- श्री हनुमानजी दिखाई नहीं पड़ रहे हैं. श्री राम बोले- "वे बगीचे में हैं. शिवशिवा दोनो बगीचे मे आए. बगीचे की सुंदरता से मन मोहित हो गया. आम्रवृक्ष के नीचे हनुमान जी गहरी नींद में सोए थे और एक लय में खर्राटों से राम नाम की ध्वनि उठ रही थी. राम नाम से पेड़ की डालियां भी झुमने लगी थी. शिव जी मस्त मगन होकर खुद भी राम राम कहकर नाचने लगे. माता पार्वती जी के कोमल पांव थिरकने लगी. शिव-पार्वती के नृत्य झनकार से स्वर्ग के देवतागण बगीचे में आ गए और सभी मस्त हो गए. माता जानकी भोजन तैयार करके प्रतिक्षारत थीं. देवर लक्ष्मण जी को बगीचे में भेजा. लक्ष्मण जी बगीचे में आए और खुद भी राम नाम की धुन में झूम उठे. अंत में सीता मैया रामजी को लेकर बगीचे मे आए तो वहां रामधूनी देख वे भी भाव वीह्ल हो उठे. रामजी ने हनुमान जी को जगाया. नृत्यसभा भंग हो गया. शिव जी खुले कंठ से हनुमान जी की सराहना करने लगे. रामजी ने भोजन करने का आग्रह भगवान शिव जी से किया. हनुमान जी को भी आग्या दे...

शनि को जाने सीधे ।शनि क्या है शनी का कार्य क्या है शनी दुख क्यों देता है

हा तो बन्धु।। शनि एक ऐसा ग्रह जिसका नाम सुनते हैं सभी मनुष्यों का अंदर एक भय बैठ जाता है मगर हमारे ग्रहों में उन्हें न्याय का स्थान मिला है तो आप सभी जानते हैं कि जो लोग न्याय प्रिय हैं वे बहुत ही सोच विचार कर अपना न्याय फैसला सुनाते हैं इसलिए शनि से डरने की आवश्यकता नहीं है आप शनि से मित्रवत व्यवहार करें शनि महराज उन्हें तंग करते है । जो लोग किसी जीव जंतु को सताते हैं उन्हें प्रताड़ित करते हैं वैसे लोगों को सनी बहुत कष्ट देते हैं शनि को आप अपना मित्र समझे आपके जीवन में कभी भी सनी बुरा प्रभाव नहीं दिखाएंगे आप सनी को समझें सनी जिसकी कुंडली में  खराब स्थिति में है वे लोग सनी को मित्र समझकर कार्य करें शनि से डरे ना कुछ विशेष उपाय ।।। प्रथम उपाय शनिवार को जल में गुड़ का सर्बत डालकर सूर्योदय के समय पीपल के वृक्ष में या शमी के  पौधा मैं डालें ।शाम के समय सरसों के तेल में काले उड़द को डालकर दीपक जलाएं और परिक्रमा करें परिकर्मा  हमारे जीवन में बहुत महत्व रखता है शुबहा मे पीपल के वृक्ष को छू कर एक पता पीपल का अपने मनोकामना को बोल कर पते पर राम लिख कर हनुमान जी के चरणों में चढ़ा दे...

घर मे झगड़ा हो तो करे ये तीन उपाय

 नमस्कार दोस्तों बहुत-बहुत स्वागत है आप सबका आज मैं आप लोगों को बताना चाह रहा हूं आज के समय में सभी के घरों में छोटी-छोटी बातों को लेकर ऐसे ही झगड़े मनमुटाव होते रहते हैं ।इसलिए आज हम इस विषय को लेकर बहुत ही अध्ययन के साथ आपको बताने जा रहा हूं ।जिस घर में  औरतें  खाना बनाने समय  मन में  जैसा सोचेंगे  मान के चलिए कि जो औरत खाना बनाते समय यह सोचे कि मेरा पति  सबसे ज्यादा प्यार मेरी गोतनी को मेरे ननद को मेरे देवरानी  करते हैं  तो  वही विचार  उस औरत के पति के मन में  अवश्य  बैठ जाता है  क्योंकि  ??आप जब आटा गूथ रही हैं उसी समय आपके मन में एबिचार चल रहा है बना रहे हैं जिस हाथ से खाना बना रहे हैं उसमें सभी ग्रहों का लेखा-जोखा मिला हुआ है  आपके मस्तिक से जो चल रहा है वह खाना में प्रवेश हो कर खाने वालों के मन में ऐसा ही एक कहावत है जैसा खान-पान जैसा देश वैसा भेस वाला हिसाब है  ना रहे जिससे खाना बना रहे हैं उसमें सभी ग्रहों पहला उपाय आपके घर में  आपके घर में अगर खाना नौकरानी बनाती है तो घर के जो मुख्य माहि...

लोभ ओर आज्ञान

एक निर्धन व्यक्ति नित्य लक्ष्मीनारायण की पूजा करता था. लक्ष्मी जी ने उसे एक अंगूठी भेंट दी जिससे जो मांगता मिल जाता. लक्ष्मीकृपा से वह साधन संपन्न हो गया. एक दिन नगर में तूफ़ान के साथ बारिश होने लगी. लोग इधर-उधर भागने लगे. तभी एक बुढ़िया उसके बंगले में आई. उसे देख वह व्यक्ति गरज कर बोला- ऐ बुढ़िया कहां चली आ रही है बिना पूछे. बुढ़िया ने कहा- कुछ देर तुम्हारे यहां रहना चाहती हूं. मेरा कोई आसरा नहीं है. इतनी तेज बारिश में मैं कहां जाऊंगी? थोड़ी देर की ही तो बात है. लेकिन उसकी किसी भी बात का असर उस व्यक्ति पर नहीं पड़ा. जैसे ही सेवकों ने उसे द्वार से बाहर किया. वैसे ही जोरदार बिजली कौंधी. देखते ही देखते उस व्यक्ति का मकान जलकर खाक़ हो गया. उसके हाथों की अंगूठी भी गायब हो गई. सारा वैभव पल भर में राख के ढेर में बदल गया. उसने आंख खोल कर जब देखा,, तो सामने लक्ष्मी जी खड़ी थीं. चरणों में गिर पड़ा. देवी बोलीं- तुम इस योग्य नहीं हो.ए जहां निर्धनों का सम्मान नहीं होता,, मैं वहां निवास नहीं कर सकती. कहकर लक्ष्मी जी आंखों से ओझल हो गई! 🕉☘💦