नमस्कार दोस्तों बहुत-बहुत स्वागत है आप सबका आज मैं आप लोगों को बताना चाह रहा हूं आज के समय में सभी के घरों में छोटी-छोटी बातों को लेकर ऐसे ही झगड़े मनमुटाव होते रहते हैं ।इसलिए आज हम इस विषय को लेकर बहुत ही अध्ययन के साथ आपको बताने जा रहा हूं ।जिस घर में औरतें खाना बनाने समय मन में जैसा सोचेंगे मान के चलिए कि जो औरत खाना बनाते समय यह सोचे कि मेरा पति सबसे ज्यादा प्यार मेरी गोतनी को मेरे ननद को मेरे देवरानी करते हैं तो वही विचार उस औरत के पति के मन में अवश्य बैठ जाता है क्योंकि ??आप जब आटा गूथ रही हैं उसी समय आपके मन में एबिचार चल रहा है बना रहे हैं जिस हाथ से खाना बना रहे हैं उसमें सभी ग्रहों का लेखा-जोखा मिला हुआ है आपके मस्तिक से जो चल रहा है वह खाना में प्रवेश हो कर खाने वालों के मन में ऐसा ही एक कहावत है जैसा खान-पान जैसा देश वैसा भेस वाला हिसाब है ना रहे जिससे खाना बना रहे हैं उसमें सभी ग्रहों पहला उपाय आपके घर में आपके घर में अगर खाना नौकरानी बनाती है तो घर के जो मुख्य माहिला है उनको खाना निकाल के देना जरुरी है जैसे चावल आटा दाल नमक मसाला अपने हाथों से निकाल कर नौकरानी को दें बेहतर होगा अगर आप खाना अपने परिवार वालों के लिए खुद परोसती हैं तो अति उतम ये आदत बनाएं । आगे जारी है बहुत लम्बा विषय है
*दीपावली पूजा विधि एवं शुभ मुहूर्त* 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ *हर वर्ष भारतवर्ष में दिवाली का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. प्रतिवर्ष यह कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है. रावण से दस दिन के युद्ध के बाद श्रीराम जी जब अयोध्या वापिस आते हैं तब उस दिन कार्तिक माह की अमावस्या थी, उस दिन घर-घर में दिए जलाए गए थे तब से इस त्योहार को दीवाली के रुप में मनाया जाने लगा और समय के साथ और भी बहुत सी बातें इस त्यौहार के साथ जुड़ती चली गई।* “ब्रह्मपुराण” के अनुसार आधी रात तक रहने वाली अमावस्या तिथि ही महालक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ होती है. यदि अमावस्या आधी रात तक नहीं होती है तब प्रदोष व्यापिनी तिथि लेनी चाहिए. लक्ष्मी पूजा व दीप दानादि के लिए प्रदोषकाल ही विशेष शुभ माने गए हैं। *दीपावली पूजन के लिए पूजा स्थल एक दिन पहले से सजाना चाहिए पूजन सामग्री भी दिपावली की पूजा शुरू करने से पहले ही एकत्रित कर लें। इसमें अगर माँ के पसंद को ध्यान में रख कर पूजा की जाए तो शुभत्व की वृद्धि होती है। माँ के पसंदीदा रंग लाल, व् गुलाबी है। इसके बाद फूलों की बात करें तो कमल और गुलाब मां लक्ष्मी...
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